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कोरोना जागरूकता विशेष कविता/ मुँह नाक में टोपी व वैक्सीन ही है दवाई

लगाये रखनाअपने मुँह नाक की टोपी। कहें जिसे मास्क भी लाइफ तब होगी। कैसा दौर है आया कुछ समझ न आये। नया वैरियंट गया नहीं है दूजा आ जाये। गजब.

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कविता/ स्वर्गीय ब्रजभूषण प्रसाद (पिताजी) के प्रति समर्पित

✍️ संजय कुमार अम्बष्ठ, पटना   त्याग भरा जीवन महान था समाज वास्ते जीना उनका काम था चेहरे पर हमेशा खुशी का भाव था जीवन के प्रति उनका बङा लगाव.

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कविता / बाबू की तस्वीर (फादर्स डे विशेष)

✍️ सुधांशु पांडे ‘निराला’        प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)   प्यारी है न्यारी है खुशियों की उम्मीदों की पिटारी है मेरे बाबू की तस्वीर। मकान की आधार शिला बचपन.

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बाल कविता/ गवर्नमेंट का झूला

✍️ सुधांशु पांडे “निराला” प्रयागराज, उत्तर प्रदेश.   गवर्नमेंट का झूला। झूलो बच्चों झूलो; गवर्नमेंट का झूला। चहल-पहल से बच्चों के स्थिरता की सीमा टूटी, कौतूहल खुशियों में है पीड़ा.

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कविता/ पापा मेरे (अपने पिताजी के गुणों का बखान करती बाल कविता)

✍️ सोमी अम्बष्ठ     (उम्र 7 वर्ष) सभी लाइन में हैं फर्स्ट नाम है इनका संजय कुमार अम्बष्ट रहते हैं हमेशा ये मस्त मस्त देते नहीं कभी किसी को.

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कविता/ श्रद्धांजलि पत्र (प्रसिद्ध पत्रकार स्व0 रोहित सरदाना को समर्पित)

✍️ सुधांशु पांडे “निराला”   उत्पीड़न को बढ़ावा देना है; खुशियों का खामोश हो जाना। अचानक मुरझा जाते हैं हंसते मुस्काते फूल, आईने पर छोड़कर जमी जमाई धूल, अब;अफसाने को.

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कविता/ कोरोना के कहर से बचाने हेतु कविता “हे प्रभु”

✍️ बबली मीरा, जमशेदपुर हे प्रभु हे प्रभु क्या कहें आपसे आप सब कुछ जानते हैं। इतनी सुन्दर जिन्दगी दिया बचाए आपको ही रखना है। जो भी गलती हुई हम.

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साहित्य/ होली विशेष गीत : फगुआ

✍️ सुधांशु पांडे मुक्त प्राण “निराला” आया-आया फगुआ; खूब उड़ाओ री गुलाल। भींग रही चुनरी रंगो से, प्रेम बरसता हैं अंगों से। सतरंगी हैं आसमान, पृथ्वी देखें होकर उतान। मले.

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