साहित्य

शिक्षक दिवस विशेष कविता/ आज है पाँच सितंबर का दिन

✍️ नीतू रानी, बायसी, पूर्णिया (बिहार) शिक्षक के प्रति एक अहसास, शिक्षक दिवस को बनाएँ खास। गुरु बिनु ज्ञान न उपजै , गुरु बिनु मिलै न भेव गुरु बिनु संशय.

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साहित्य

कविता/ यही कर्म है !

सच पूछती हूँ माँ , सच सच बताना क्या मैं अब तुझे, पराई लगती हूँ हर समय तूंँ बार बार कहती है ससुराल में जाकर, तू नियम से रहना ये.

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साहित्य

कविता/ वो बैसाखी का दिन

दिन था वो बैशाखी का, जब काल, धरा पर आया था जनरल डायर का धर कर रूप, उसने उत्पात मचाया था, लगी सभा थी जलियांबाग में, आए अन गिन नर.

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साहित्य

कविता/ हरित क्रांति

✍️ कवि सुरेश कंठ, बथनाहा, अररिया (बिहार) देख मुनासिब इस घड़ी में समय बिलकुल सुहाना है मत पूछो ठंड कितना है किसको अभी सुनाना है नहीं मालूम सितम कितना समय.

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धर्म / आस्था विशेष साहित्य

छठ महापर्व विशेष/ सूर्य षष्ठी- देवसेना की व्रत पूजा है छठ पूजा

सूर्यदेव को अर्ध्य देके, होती सूर्यदेव की है पूजा। सदियों से ये चली आरही है, प्रातः बेला में पूजा।। सूर्यदेव से स्वस्थ जीवन की, करें सभी कामना। इसलिए सूर्योदय पर,.

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विशेष साहित्य

हिंदी दिवस विशेष/ “हिंदी दिवस”, हिंदी भाषा के गौरव की बात है

हिंदी के हम बनें पुजारी, हिंदी ही अपनी भाषा है। ‘राजभाषा’ हिंदी,”राष्ट्रभाषा” बने अभिलाषा है।। हिंदी माथे की है बिंदिया, भाषामुकुट का ताज है। राष्ट्र की है स्वप्न सलोनी, सब.

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विशेष साहित्य

कविता/ रक्षाबंधन : भाई- बहन का पावन अनुपम त्योहार

प्रेम, स्नेह, करुणा, ममता का यह है त्योहार । ये रक्षाबंधन है, भाई बहनों का है त्योहार ।। भाई ले बहन के रक्षा, का संकल्प त्योहार । ये रक्षाबंधन है,.

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साहित्य

साहित्य/ चन्द्रयान – 3 का सफर

चंदा मामा, प्यारे मामा हैं कितने सभी के दुलारे हम पहुंँच गए उनके द्वार पर चंद्रयान – तीन के सहारे 23/8/2023 वह दिन याद रहेगा समय शाम 6:04 मिनट पर.

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ज़रा हटके बड़ी खबर राष्ट्रीय साहित्य

आज 11 बजे से 24 घंटे चलने वाले ऑनलाइन “कृष्णायन अखण्ड काव्यार्चन” का होगा शुभारंभ

भगवान श्री कृष्ण के जीवन पर आधारित साझा महाकाव्य कृष्णायण और वृंदावन में प्रस्तावित श्री बाँके बिहारी अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव की सफलता की कामना हेतु आज 11 बजे से कल.

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साहित्य

कविता/ संभ्रांत परिवार

एक कहानी मैं सुनाता विषय है संभ्रांत परिवार सुखी – चैन तब होती है जब होता है संभ्रांत परिवार परिवार भला चंगा रहे तब मिलेगी हमें संस्कार कोई दिक्कत नहीं.

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